कुछ तो, है…तुझमे भी और मुझे में भी…

एक टुकड़ा प्यार , एक टुकड़ा चाँद , है… तुझमे भी और मुझमे भी…

ख्वाहिशो का एक समंदर, अरमानो की रिमझिम बारिशें , है… तुझमे भी और मुझमे भी…

जज्बातो के , खयालातों के हंगामे , है… तुझमे भी और मुझमे भी…

मोहब्बतों का एक खुदा , नफरतो का एक दरिंदा , है… तुझमे भी और मुझमे भी…

मीठे दर्द और कड़वे सच , है… तुझमे भी और मुझमे भी…

जरा सा जंगलीपना  , जरा सा बचपना , है… तुझमे भी और मुझमे भी…

हौसलो की उड़ान का एक आसिया, है… तुझमे भी और मुझमे भी…

गुलाबी सी मोहब्बत , बेकरारी सी बेकरारी, है… तुझमे भी और मुझमे भी…

डर है एक ख्वाब के खोने का , तुझको भी और मुझको भी…
पर, हर सवाल का एक जवाब , है… तुझमे भी और मुझमे भी…

मैं नहीं जानता क्यों,
कुछ हमारा , कुछ तुम्हारा , है…तुझमे भी और मुझमे भी…

– आदर्श

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